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Irrfan Khan ने अपने स्वाभाविक और संजीदा अभिनय से जीता लोगों का दिल, वीडियो में जानिए उनके परिवार के बारे में सबकुछ 

 
Irrfan Khan ने अपने स्वाभाविक और संजीदा अभिनय से जीता लोगों का दिल, वीडियो में जानिए उनके परिवार के बारे में सबकुछ 

अपने अभिनय से देश ही नहीं बल्कि दुनिया के दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्म अभिनेता इरफान खान का बुधवार को 53 साल की उम्र में मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हो गया। इरफान लंबे समय से कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी से पीड़ित थे और उन्होंने 2018 में इसे सार्वजनिक भी किया था, लेकिन दो साल बाद वह जिंदगी से चल रही इस जंग को हार गए। वह भारतीय सिनेमा के ऐसे कलाकार थे, जिनकी तुलना किसी अन्य कलाकार से नहीं की जा सकती। अभिनय और सिनेमा का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जिसका ज्ञान और अनुभव उन्हें न रहा हो। सिनेमा उनमें बसता था और वह खुद सिनेमा को जीते थे, इसीलिए वह मिसाल बन गए। उनका सहज और गंभीर अभिनय उन्हें सालों तक जिंदा रखेगा।

दिग्गज अभिनेताओं में गिने जाने वाले इरफान खान ने अपने करियर की शुरुआत टेलीविजन धारावाहिकों से की थी। अपने शुरुआती दिनों में वह चाणक्य, भारत एक खोज, चंद्रकांता जैसे धारावाहिकों में नजर आए इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में छोटे-बड़े रोल किए लेकिन उन्हें असली पहचान 'मकबूल', 'रोग', 'लाइफ इन ए मेट्रो', 'पान सिंह तोमर', 'द लंच बॉक्स' जैसी फिल्मों से मिली। उन्होंने 30 से ज्यादा बॉलीवुड फिल्मों में काम किया है। इरफान हॉलीवुड में भी भारतीयता का प्रतिनिधित्व करने वाला जाना-माना नाम हैं। उन्होंने फिल्म ए माइटी हार्ट, स्लमडॉग मिलियनेयर और द अमेजिंग स्पाइडर मैन में भी काम किया है। साल 2011 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।

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60वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2012 में इरफान खान को फिल्म पान सिंह तोमर में उनके बेहतरीन अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया गया था। फिल्म 'हासिल' के लिए उन्हें साल 2004 के फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार समेत तीन फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिले सिनेमा के क्षेत्र में नायक तो बहुत हुए, लेकिन इरफान जैसा नायक सदियों में कोई एक ही होता है। दरअसल, वे एक हरफनमौला फिल्मी शख्सियत थे। उनके अभिनय का हर पहलू इतना सधा हुआ था कि हर दर्शक उस पर मोहित हो जाता था। बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी छाप छोड़ने वाले सदाबहार अभिनेता इरफान खान को आज पूरी दुनिया जानती है। हरफनमौला अभिनेता इरफान ने अपने अभिनय के दम पर हर वर्ग के दर्शकों को प्रभावित किया है। इरफान का अपना अलग अंदाज है, वे ऐसे कलाकार हैं कि अपनी जबरदस्त एक्टिंग से किसी भी किरदार में जान डाल देते हैं। हॉलीवुड अभिनेता टॉम हैंक्स ने कहा था कि इरफान की आंखें भी अभिनय करती हैं। अपनी अभिनय साधना और हुनर ​​के बल पर एक तरफ वे कलात्मक ऊंचाइयों के शिखर पर पहुंचे तो दूसरी तरफ लोकप्रियता के सर्वोच्च शिखर पर भी पहुंचे। हिंदी सिनेमा में वे एक अलग शख्सियत बन गए, जिसका कोई मुकाबला नहीं।

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उनकी अभिनय शैली जहां स्वाभाविक लगती है, वहीं अनूठी और आश्चर्यजनक भी थी, क्योंकि आवाज, हाव-भाव, हाव-भाव और संवाद सब कुछ उनके नियंत्रण में था। उनमें दिखावा या शेखी बघारने जैसा कुछ नहीं था। बल्कि उनमें एक संपूर्ण और निपुण अभिनेता के सभी गुण थे। उनकी फिल्में देखते हुए ऐसा लगता है कि वे बिना अभिनय के भी दमदार अभिनय करते हैं। मैंने देखा कि कई दृश्यों में, जहां उन्हें कुछ बोलना नहीं था, उन्होंने जबरदस्त प्रभाव पैदा किया। मैं समझ गया कि इस कलाकार ने अभिनय की जड़ को पकड़ लिया है। इरफान के पिता टायर व्यापारी थे। पठान परिवार से होने के बावजूद इरफान बचपन से ही शाकाहारी रहे, उन्हें किसी तरह की लत नहीं थी। उनके पिता हमेशा उन्हें यह कहकर चिढ़ाते थे कि पठान परिवार में ब्राह्मण पैदा हो गया। उन्होंने वर्ष 1984 में दिल्ली के राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में अभिनय का प्रशिक्षण लिया। उन्हें छात्रवृत्ति भी मिली। इरफान खान के शुरुआती दिन संघर्ष से भरे थे। जब उन्होंने एनएसडी में दाखिला लिया, उन्हीं दिनों उनके पिता का निधन हो गया। घर की आय का जरिया खत्म हो गया। उन्हें घर से पैसे मिलने बंद हो गए। उन्हें सिर्फ एनएसडी से मिलने वाली फेलोशिप का सहारा था।

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वहीं उनकी सहपाठी लेखिका सुतापा सिकदर ने उनका पूरा साथ दिया और 23 फरवरी 1995 को उन्होंने उनसे विवाह कर लिया। उनके दो बेटे हैं- बबली और अयान। अभिनय की शिक्षा लेने के बाद इरफान मुंबई चले गए। मुंबई आने के बाद वे धारावाहिकों में व्यस्त हो गए। लोकप्रिय धारावाहिकों में इरफान खान के बेहतरीन अभिनय ने फिल्म निर्माता-निर्देशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। मीरा नायर की बहुचर्चित फिल्म सलाम बॉम्बे में उन्हें मेहमान भूमिका निभाने का मौका मिला। सलाम बॉम्बे के बाद इरफान खान ऑफबीट फिल्मों में अभिनय करते रहे। एक डॉक्टर की मौत, कमला की मौत और प्रथा जैसी समानांतर फिल्मों में अभिनय करने के बाद इरफान ने मुख्यधारा की फिल्मों की ओर रुख किया। हासिल में रणविजय सिंह की नकारात्मक भूमिका में इरफान खान ने अपनी अभिनय क्षमता साबित की। जल्द ही वे मुख्यधारा के निर्माता-निर्देशकों की भी पसंद बन गए।

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