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भारत के जिस खूंखार जासूस पर बनी Salman Khan की Ek Tha Tiger, वीडियो में जानिए कैसे बने पाकिस्तानी सेना में मेजर 

 
भारत के जिस खूंखार जासूस पर बनी Salman Khan की Ek Tha Tiger, वीडियो में जानिए कैसे बने पाकिस्तानी सेना में मेजर 

भारत और पाकिस्तान के बीच 18 साल बाद 25 फरवरी को भले ही युद्ध विराम समझौता हो गया हो, लेकिन लोगों को हमेशा से इस बात पर संदेह रहा है कि क्या दोनों देशों के बीच संबंध कभी सामान्य हो पाएंगे। भारत की खुफिया एजेंसी रॉ यानी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग पाकिस्तान के मंसूबों को नाकाम करने के लिए हर पल सक्रिय रहती है। आज हम आपको एक ऐसे भारतीय जासूस की कहानी बताने जा रहे हैं, जो भारत की सेवा करने के लिए पाकिस्तानी सेना में मेजर बन गया। यह भारत का वो जासूस था, जो महज 23 साल की उम्र में पाकिस्तान चला गया और फिर कभी अपने वतन वापस नहीं लौट सका। कहा जाता है कि यही जासूस सलमान खान की फिल्म 'एक था टाइगर' की प्रेरणा था।

अंडरकवर एजेंट रवींद्र कौशिक
यह कहानी है रॉ के जासूस रवींद्र कौशिक की, जो शहादत के वक्त अपने वतन की मिट्टी को छू भी नहीं पाए। उन्होंने दुश्मन के देश में अपनी जान दे दी और वहीं उनका अंतिम संस्कार किया गया। रवींद्र कौशिक का नाम साल 2012 में हर किसी की जुबान पर तब आया, जब 'एक था टाइगर' रिलीज हुई। अंडरकवर एजेंट के तौर पर पाकिस्तान गए रवींद्र कौशिक की कहानी सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। उनका जन्म राजस्थान के श्रीगंगानगर में वर्ष 1952 में हुआ था। रवींद्र को थिएटर का बहुत शौक था और जब वे रॉ के लिए चुने गए थे, तब वे किशोर ही थे। रवींद्र ने वर्ष 1975 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और फिर रॉ में शामिल हो गए। 

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रॉ ने उन्हें सभी जरूरी ट्रेनिंग दी 
रॉ ने उन्हें पाकिस्तान में भारत के लिए अंडरकवर एजेंट की नौकरी की पेशकश की और महज 23 साल के रवींद्र एक मिशन पर पाकिस्तान चले गए। कहा जाता है कि रॉ ने उन्हें करीब दो साल तक ट्रेनिंग दी। कौशिक को दिल्ली में इस तरह से ट्रेनिंग दी गई कि वे मुस्लिम युवक जैसे दिखें। उन्हें उर्दू और मुस्लिम धर्म से जुड़ी कुछ अहम बातें सिखाई गईं। उन्हें पाकिस्तान के बारे में भी काफी जानकारी दी गई। वे पंजाबी भाषा बोलने में माहिर थे, जो पाकिस्तान के ज्यादातर हिस्सों में बोली जाती है।

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रवींद्र कौशिक से नबी अहमद शाकिर 
1975 में उन्हें नबी अहमद शाकिर के नाम से पाकिस्तान भेजा गया। इसके बाद वे सिविलियन क्लर्क के तौर पर पाकिस्तानी सेना का हिस्सा बन गए. इसके बाद उन्हें पाकिस्तानी सेना के अकाउंट डिपार्टमेंट में भेज दिया गया. उन्होंने पाकिस्तान जाकर इस्लाम कबूल कर लिया. कहा जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान जाकर आर्मी यूनिट में तैनात एक दर्जी की बेटी से शादी की, जिसका नाम अमानत था। इसके बाद वे एक बेटे के पिता बने और कहा जाता है कि 2012-2013 के बीच उनके बेटे की मौत हो गई।

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भारत को मिली कई जानकारियां
साल 1979 से 1983 के बीच उन्होंने भारतीय सेना को कई अहम जानकारियां मुहैया कराईं। उनके द्वारा भेजी गई खुफिया जानकारियां देश के बहुत काम आईं। उनकी बहादुरी को देखते हुए उन्हें टाइगर नाम भी दिया गया। लोग उन्हें 'ब्लैक टाइगर' के नाम से भी जानते थे। सितंबर 1983 में भारत ने एक निचले स्तर के जासूस इनायत मसीह को रविंदर कौशिक से संपर्क करने को कहा। लेकिन पाकिस्तान ने उन्हें पकड़ लिया और फिर उन्हें पूरी सच्चाई पता चली। कुछ लोगों का मानना ​​है कि कौशिक अपनी गलती की वजह से नहीं बल्कि रॉ की गलती की वजह से पकड़े गए थे। 

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1985 में मौत की सज़
कौशिक को 1985 में पाकिस्तान की एक अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई थी। हालांकि, बाद में पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने इस सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया। उन्हें करीब 16 साल तक पाकिस्तान के सियालकोट की कोट लखपत और मियांवाली जेलों में रखा गया। उनकी मौत के बाद उन्हें मुल्तान की सेंट्रल जेल में दफ़ना दिया गया. उनके भतीजे विक्रम वशिष्ठ ने एक बार एक इंटरव्यू में इस बारे में बताया था। जेल में रहने की वजह से उन्हें टीबी, अस्थमा और दिल की बीमारियाँ हो गई थीं। रवींद्र अपनी मां से बहुत प्यार करते थे और वह उन्हें पाकिस्तान नहीं भेजना चाहती थीं। लेकिन कुछ करने के इरादे से वह रॉ के एजेंट बनकर दुश्मन देश चले गए थे।

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