Thalaivi Movie Review: ‘थलाइवी’ जयललिता की सिनेमा से सियासत तक के सफर की कहानी

 
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कलाकार: कंगना रनौत, अरविंद स्वामी, भाग्यश्री, राज अर्जुन, जीशु सेनगुप्ता
निदेशक: ए.ए. विजय 
वर्ग: हिंदी, बायोपिक
समय: 2 घंटे 34 मिनट
रेटिंग: 3.5 / 5

कंगना रनौत की फिल्म 'थलाइवी' पिछले कुछ समय से शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह फिल्म तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की बायोपिक है। फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म में कंगना रनौत जयललिता के रोल में नजर आ रही हैं। फिल्म जयललिता के राजनीतिक करियर को अच्छी तरह से चित्रित करने की कोशिश करती है।

जयललिता के जीवन और एमजी रामचंद्रन के साथ उनके संबंधों की कहानी लगभग ज्यादातर लोग जानते हैं। निदेशक ए.एल. विजय ने फिल्म में जयललिता के संघर्ष को चित्रित करने का अच्छा काम किया है। फिल्म की शुरुआत जयललिता के शपथ ग्रहण दृश्य से होती है जिसमें वह कहती हैं, "मैं तब तक विधानसभा में पैर नहीं रखूंगी जब तक मैं तमिलनाडु की मुख्यमंत्री नहीं बन जाती।" कहानी फिर फ्लैशबैक में चली जाती है और जयललिता को एक सफल अभिनेत्री के रूप में चित्रित किया जाता है। तभी उनकी जिंदगी में सुपरस्टार एमजी रामचंद्रन (अरविंद स्वामी) की एंट्री होती है। जयललिता और एमजीआर के बीच निजी और निजी दोनों तरह के संबंध हैं। बाद में वे राजनीति में जयललिता के गुरु बने। बहुत संघर्ष के बाद, जयललिता सिर्फ तमिलनाडु राज्य में ही नहीं, भारतीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गईं।

समीक्षा

निर्देशक विजय ने आत्मसम्मान और पितृसत्ता के खिलाफ एक महिला की लड़ाई को ईमानदारी से चित्रित करने की कोशिश की है। फिल्म में जयललिता और एमजीआर के बीच की बॉन्डिंग को बखूबी दिखाया गया है। एक सीन में जया और एमजीआर फोन पर बात करते हुए एक भी शब्द नहीं बोलते हैं लेकिन उनकी भावनाएं दर्शकों तक पहुंचती हैं। यह फिल्म का मूल है। फिल्म का पहला भाग जया और एमजीआर की प्रेम कहानी पर केंद्रित है और दूसरा भाग जया के राजनीतिक करियर को दर्शाता है। फिल्म में ढेर सारे डायलॉग और कंगना का स्लो मोशन वॉक है। फिल्म की एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर लाउड हो सकता है। फिल्म के गाने भी कहानी में थोड़ा ब्रेक लगाते नजर आते हैं।

अभिनय

कंगना रनौत बॉलीवुड की बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक हैं। उन्होंने जयललिता की भूमिका भी बखूबी निभाई है। कहीं भी कंगना ने जयललिता की नकल करने की कोशिश नहीं की और कहानी-दृश्य की मांगों के अनुसार काम किया। फिल्म में कंगना और अरविंद स्वामी के बीच सहयोग उल्लेखनीय है। अरविंद स्वामी की बात करें तो एमजीआर जैसे लोकप्रिय सुपरस्टार और राजनेता की भूमिका उनसे बेहतर कोई नहीं निभा सकता था।

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